सोमवार, ३१ जानेवारी, २०२२

मुझे मेरी दुनिया ही हसीन है!

मुझे मेरी दुनिया ही हसीन है 
चाहे मै अकेला ही क्यों ना हूँ ! 
ना कोई रंजीश है ना कोई शिकवा 
मश्गुल हूँ मै अपने ही ग़म में ! 
ना किसी से लेना है 
ना किसी को कुछ देना है , 
हर पल हर लम्हा 
खुद के लिये ही जिना है ! 
कोई कहे खुदगर्ज मुझे 
क्या फरक पड़ता है ? 
औरों के लिये जब सोचता था 
बड़ा दयावान हुवा करता था , 
जब सोचने लगा कुछ अपने लिये 
तब हो गया खुदगर्ज सब के लिये ! 
अब मै हूँ और मेरी तन्हाई है 
अक्सर हम बैठ कर बातें करते है 
ऐसा होता तो कैसा होता ? 
वैसा होता तो कैसा होता ? 
कहीं दूर दूर नजर देखते है हम 
कोई धुंदला सा साया नजर आता 
पास आते आते वो भी गायब हो जाता ! 
अब मै हूँ और मेरी ही दुनिया है 
मेरे अलावा अब मेरा कोई नही है !
 
संकलन : सुशिल म. कुवर


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