भील हूँ पर ढील नहीं, कुछ लिखूँ पर शब्द नहीं !
तीर-कमान हैं पर अँगूठा नहीं, कुछ दूँ पर धन नहीं !
गुरू दक्षिणा हैं पर द्रोणाचार्य नहीं, ढूँढे पर जगह नहीं !
सीधे सादा हूँ पर चालाक नहीं, मिट्टी हैं पर सोना नहीं !
जमीन हैं पर मेरी नहीं,
बीज हैं पर खाद नही !
आदिवासी हूँ पर गुलाम नहीं,
मूलनिवासी हूँ पर वनवासी नहीं !
शिक्षा हैं पर शिक्षक नहीं, अस्पताल हैं पर डाक्टर नहीं !
औहदा हैं पर औकात नहीं,
बेतन हूँ पर वेतन नहीं !
बच्चे हैं पर होस्टल नहीं, छात्रावास पर व्यवस्था नहीं ! हूनर हैं पर हासिल नहीं, नेता हैं पर मेरा नहीं !
गीता हैं पर संविधान नहीं,
नियम हैं पर पालन नहीं !
आरक्षण हैं पर मिला नहीं,
अनेक हैं पर एक नहीं,
ताकत हैं पर लगाई नहीं !
मौत हैं पर नसबन्दी नहीं,
कत्लेआम हैं मगर मोमबत्ती नहीं !
जाति हैं मगर समाज नहीं,
धर्म हैं पर मिलाया नहीं !
गम हैं पर आँसू नहीं, पराये हैं पर अपने नहीं !
पलायन हैं पर ठहराव नहीं, मेहनत हैं पर मेहनाता नहीं !
वोट हैं पर खोट नहीं, मै नहीं मगर और ही सही !
शब्द हैं पर जीभ नहीं, मानव हूँ पर औकात नहीं !
प्रेम हैं पर मुझ पर नहीं, जानवर हैं पर मै नहीं !
भील हूँ पर ढील नहीं कुछ लिखूँ पर शब्द नहीं !
संकलन: सुशिल म. कुवर ✍️
फोटो: प्रतिकात्मक आवर्जून शेअर करा
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